गांव का स्टेशन | very short inspiring stories in hindi

गांव का स्टेशन | very short inspiring stories in hindi पटकथा काल्पनिक विचारों पर आधारित है, वास्तविक जीवन से इस पटकथा के पात्रों का कोई लेना देना नहीं है.

रचना गांव के एक भिखारी सोहनलाल के आसपास घूम रही है……………. सोहनलाल एक छोटे से गांव में रहता है,पास में एक छोटा कस्बा पड़ता है और और दूसरे नंबर पर जय प्रेरणादायक कहानी छोटी सी आपको एक मैसेज देती है.

आपको एक प्रेरणा देती है ,पढ़िए इस छोटी सीख वाली कहानी को और आनंद लीजिए गांव का स्टेशन वेरी शॉर्ट इंस्पायरिंग स्टोरी इन हिंदी में जो लिखी गई है.

गांव का स्टेशन | very short inspiring stories in hindi | कॉलेज के छात्रों के लिए प्रेरणादायक कहानियों | Short Motivational Story In Hindi With Moral
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गांव का स्टेशन | very short inspiring stories in hindi

inspiring startup stories in hindi के पात्र : — सोहन लाल। गांव के लोग | रेलवे स्टेशन के लोग

धी रात का समय है………… आकाश में बादल पूरे जोर से गरज रहे हैं ………… साथ ही साथ बिजली पूरे जोर से कड़क रही है गांव में रात होने की वजह से सन्नाटा छाया हुआ है.

 

                 गांव के आवारा कुत्ते बादलों ke गरजने से भौंकना शुरू कर देते हैं ……………इस गांव के लोगों संख्या है 1500 ke करीब है गांव में छोटे-छोटे मकान hai …………. कुछ लोगों के कच्चे मकान है.

और जो पैसे वाले हैं ……………उनके मकान { house } पक्के हैं, इस गांव के लोग { Gaon ke log } खेतीवाड़ी से जुड़े { khetibari se jude } हैं 90 परसेंट लोग Kheti करते हैं……….. इसी बीच एक भिखारी का घर { bhikhari ka ghar } है जिसका नाम सोहनलाल है घर कच्चा है.

 

हल्की सर्दी का मौसम { sardi ka mausam } है और kuch time ke baadh बारिश होने लगी है …………… Sohan lal  सो रहा है और पास ही चारपाई के नजदीक बोरी पर बैठा एक छोटा सा कुत्ता सो रहा है

               धीरे-धीरे barish तेज होने लगी और सोहन लाल के मकान की छत कच्ची है ……………. छत में से पानी नीचे आने लगता है और पानी की बूंदे ……………   चारपाई के { Bed } पास पड़े बर्तनों पर गिरने लगते हैं………….. उसे अच्छी छूनी पैदा hoti hain सोहनलाल को इस बात की कोई खबर नहीं ……….. वह अपनी नींद में आराम से सो रहा है चारपाई पर.

 


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कुछ समय तक पानी की बूंदे गिरती रही……….. बारिश और तेज होने लगी ……….. बाद में जहां पर सोहनलाल चारपाई पर पड़ा सो रहा था तो  पानी उसके माथे पर  टपक्ने लगा

                उसकी एकदम आंख खुल गई उसने ऊपर की तरफ देखा और फिर चारपाई से उठकर दरवाजा खोला तो तेज हवा और बारिश चल रही थी ……….. उसने बाहर निकल कर देखा तो बारिश बहुत जोरदार हो रही थी सोहनलाल बारिश को देखते बोला

” साला फिर से होने लगा है…….हमारे ​गरिबो पर ते तरश कर जिनके कच्चे मकान है ….पक्के मकानें वालों को तो कोई फरक हीं नहीं पडता।”

 

              बाद में Sohan lal  ने दरवाजे को बंद कर दिया ………………. जबकि बारिश और हवा दोनों जोरों पर चल रही थी अंदर आकर उसने छत तरफ देखा जिसमें से पानी की बूंदे नीचे गिर रही थी.

और फिर उसने अपनी चारपाई को एक तरफ किया ……….. कुत्ते को अपनी चारपाई के नीचे रखकर फिर से लेट गया और पानी की बूंदे उसी तरह गिरती रही………..आकाश में बादल और बिजली ​गरजते रहे.

 


सुबह का समय था | प्रेरणादायक लघु कहानी- गांव का स्टेशन

 

सुबह का समय hain…………… सूरज की किरने टूटी हुई खिड़की के बीच से गुजरती हुई …………… Sohan lal जिस चारपाई पर पड़ा है उस पर पड़ती है ……………लेकिन सोहनलाल को इस बात की कोई खबर नहीं कि सुबह { morning } हो चुकी है.

              कुछ समय के बाद { after the some time } उसने आंख खोली तो नीचे देखा की थोड़ा-थोड़ा पानी { water } खड़ा था उसका छोटा सा कुत्ता उसके साथ चारपाई पर पडा है

कुछ समय के बाद सोहनलाल उठता है उसने बाहर की तरफ देखा तो धूप निकली है …………… यह देखते वह चारपाई से उठकर दरवाजे को खोलता है …………… और बाहर आ जाता है गांव के कुछ लोग इधर से उधर जा रहे हैं …………… लेकिन अवकाश में जो बादल है अभी भी हैं..बारिश कब होने लगे इस बात की कोई गारंटी नहीं.

 


Dhoop को देखते हुए सोहनलाल बोलता है चलो अच्छा हुआ Dhoop तो निकल गई ……………  वरना आज बारिश की वजह से घर पर ही बैठना पड़ता…………… बाद में वह अंदर आया

            दीवार पर लटक रही भगवान की तस्वीर के आगे सिर झुकाया और चाय बनाने लगा …………… उसने चाय पी और कुत्ते को  पिलाई और हाथ में कटोरा लेकर घर के दरवाजे को बंद किया ……………और गांव के स्टेशन की तरफ निकल पड़ा भीख मांगने के लिए.


 

गांव का स्टेशन 

कुछ समय के बाद सोहनलाल अपने छोटे से कुत्ते के साथ गांव के रेलवे स्टेशन { Railway Station } पर पहुंच जाता है ………… गांव के रेलवे स्टेशन पर एक छोटी रेल गाड़ी खड़ी है.

       लोगों की ज्यादा तो भीड़ नहीं ………. लेकिन ठीक – ठाक है 40/50 लोग वहां पर बैठे दूसरी गाड़ी आने का इंतजार {wait } कर रहे हैं सोहनलाल ने कंधे में डालें झूले में कटोरा  निकाला वहां पर बैठे लोगों से भीख मांगने लगा.


सोहनलाल …….. …….. भाई दे ना कुछ भिखारी को …….. …….. भगवान तुम्हारा भला करेगा.

आदमी…………… …….. चल निकल यहां से …….. साले सुबह-सुबह भीख मांगने आ जाते हैं.

 

Sohan lal उसकी तरफ देखता हुआ आगे की तरफ चला गया और कुत्ता उसके कंधे पर बैठा हुआ इधर-उधर देख रहा hain …….. एक मैडम टेबल पर बैठी है………. जिसने फटी हुई जींस पहनी है ……….. सोहनलाल उसके आगे कटोरा करता है लेकिन उसने na mein सिर हिला दिया.

 

सोहनलाल …………… कुछ दे बेटा ……….. ऊपरवाला तेरा भला करेगा.

लड़की मोबाइल { Phone } पर किसी से चैट करती रही.

सोहनलाल …….. ……. तू क्या देगी……. तेरी खुद की पेंट पाटी है भिखारी की तरहां लग रही है.

 

सोहन लाल लड़की को बोलते हुए आगे की तरफ चला गया …………. और हर किसी के आगे कटोरा कर देता……… चाहे वह लड़की हो चाहे वह लड़का चाहे बुजुर्ग आदमी इनमें से कुछ लोगों ने उसके कटोरे में पैसे रखे.

   

 कुछ ने सिर्फ उल्टा हाथ मार दिया ऐसे ही शाम हो जाती है ………….. सोहनलाल घर लौट रहा है…………आसमान में बिजली गरज रही है और हवा चल रही है……………. वह घर लौटते – लौटते गांव की दुकान { Gaon ki dukaan } पर रुकता है…………उसने दुकान वाले के टेबल पर ₹200 रखा, चावल और साथ में आटा डालने को बोला

 

दुकान वाला………………. सोहनलाल पहले पिछला हिसाब तो चुका दे ₹500 खड़ा है …………. पूरे 3 महीने का अब कहो तो काट लू बाकी  ₹100 रपए बच जाऐगा.

 

सोहनलाल …….. अरे नहीं भैया ……………मैं बाद mein चुका दूंगा तेरा 500 आज लोगों ने पैसा नहीं दिया धंधे में मंदा चल रहा है भाई थोड़ा तरस कर. 

दुकान वाला …….. ……..  गांव का है ………….. इसलिए थोड़ा तरस खा रहा हूं.

बाद में सोहनलाल ने चावल और आटा उठाया और घर की तरफ निकल पड़ा जैसे ही वह घर पहुंचा बूंदाबांदी होने लगी.

 

सोहनलाल ……………….. चलो शुक्र है………भीगने से पहले घर पहुंच गए वरना इस कमबख्त का क्या भरोसा कहां पर कपड़े गीले कर दे

बाद में सोहनलाल ने खाना बनाया और कुत्ते को खिलाया और चारपाई पर लेट गया.

 


 

जीवन में सीख देने वाली कहानी – गांव का स्टेशन

 

जैसे-जैसे रात { night } निकलती गई ………. बारिश जोर पकड़ने लगी तेज हवा की वजह से कमरे { Room } की जो खिड़की थी ……….. खुल जाती है और हवा की वजह से फड़फड़ाने लगती है.

                 सोहनलाल चारपाई पर कंबल लपेटे सो रहा है ……… अचानक खिड़की की हड़बड़ाहट ने उसकी नींद kee आंखें खोल दी सोहनलाल खिड़की को बंद करने के लिए चारपाई से उठा बारिश को देख कर सोहनलाल बोलता है

ना जाने कब हटेगी ……….. हर रात को आ जाता है नींद खराब करने के लिए ………. बाद में उसने खिड़की को बंद किया अच्छे तरीके से और सो गया ………. छत में से पानी { Water } टपकना शुरू हो चुका है.

 


सुबह का समय था | प्रेरणादायक लघु कहानी- गांव का स्टेशन

 

सुबह होती है………….आकाश { Skey } में पूरी तरह से काले बादल छाए हुए हैं ………. बारिश बंद hain और धीमी – धीमी हवा चल रही है सोहनलाल उठता है और उठकर चारपाई पर बैठ जाता है.

 

                उसने अपने पास सो रहे कुत्ते की तरफ देखा ………… जो कि नीचे जमीन पर सो रहा hain बाद में वह उठा और उसने खिड़की को खोल कर देखा तो आसमान में बादल छाए हुए थे.

उसके बाद दरवाजे को { Door ko } खोला जो की हल्का सा टूटा हुआ था और बाहर आकर खड़ा हो गय……… गांव की दो तीन औरतें  आपिस में बातें करती हुई और उसकी तरफ देखते हुए आगे चली गई.

 

                बाद में वह फिर अंदर आ जाता है ………… सोहनलाल चाय बनाने लगा बाद में खाना खाने के बाद उसने घर के दरवाजे को बंद किया और गांव के स्टेशन { Train Station } की तरफ निकल जाता है.


 

गांव का स्टेशन | Motivational Story In Hindi On Opportunity

कुछ समय के बाद Sohan lal  गांव के रेलवे स्टेशन पर पहुंच जाता है……………….. छोटा कुत्ता उसके कंधे पर बैठा है सोहनलाल ने अपने Bag में से भीख मांगने वाला कटोरा निकाला और लोगों से भीख मांगने लगा.

 

                     कुछ लोगों ने उसके katora में पैसे डाले और कुछ ने ना में सर हिला दिया ………………. सोहनलाल ने कटोरे में से पैसे उठाएं जो कि तकरीबन 60 70 पर थे और बाद में वह आकर रेलवे स्टेशन पर बने एक बेंच पर बैठ जाता है.

सोहनलाल खुद से बोलता है पता नहीं पहले धंधा इतना अच्छा चलता था ……………….लेकिन अब पता नहीं क्या हो गया ……………….दिन का ₹100 भी नहीं बन पाता ……………….ऐसे कैसे चलेगा.

 

                  ऐसे तो मैं एक वक्त की रोटी { Roti } भी नहीं खा पाउंगा ……………….लगता है कोई और काम { Business } ही ढूंढना पड़ेगा सोहनलाल वहां पर बैठा सोचता रहा सोचता रहा ……………….कटोरा धरती पर पड़ा था.

कुछ आते – जाते लोग पांच ₹10 उसके कटोरे में डाल कर आगे चले जाते ……………….फिर उसके सामने से एक खूबसूरत लड़की गुजरी जिसने सलवार कमीज { salwar kameez } पहनी थी और Bho जैसे सोहनलाल के पास से गुजरने लगी उसके अचानक पांव में पहनी जूती टूट गई.


 

लड़की ने टूटी हुई जूती को हाथ में उठाया………………. और बोली हे भगवान मेरी तो जूती टूट गई ……………….अब मैं टूटी हुई जूती से कैसे चलूंगी तभी लड़की की नजर पास बैठे सोहनलाल पर पड़ती है.

                उसने सोहनलाल से पूछा बाबा जहां पर टूटी हुई जूती ठीक करने वाला कोई मोची बैठा है ……………….जा फिर उसकी कोई दुकान है जहां पर ……………….क्योंकि मेरी जूती टूट गई hain ……………….सोहनलाल ने ना में सर हिला दिया.

 

बोला जहां पर कोई मोची { mochi  } नहीं बैठता ……………….बेटी तुम मेरी जूती पहन लो अगर दूर जाना है………………. लड़की बोली नहीं – नहीं बाबा ऐसा नहीं मैं कर सकती अगर कोई मोची है तो बता दीजिए

              मैं उसे अपनी जूती ठीक करवा लेती हूं ……………….सोहनलाल बोला नहीं बेटा जहां कोई मोची नहीं है अगर तुम बेटा जहां पर रुक जा फिर मेरे साथ गांव { Gaon } चलो मेरे घर तो एक जूते नहीं पड़ी है.

 

तुम वह पहन कर जा सकती हो………………. मैं तुम्हारी इतनी मदद जरूर कर दूंगा ……………… .लड़की ठीक है बाबा लेकिन तुम्हारा गांव { Village }  कितनी दूर है जहां से Sohan lal ने बताया कि उसका गांव बगल में ही है.

            तो बाद में आ सोहनलाल और बोल लड़की सोहनलाल के घर आते हैं और लड़की उसका घर देखकर हैरान जा रह जाते हैं लड़की Sohan lal से बोलती है बाबा आप इतने पुराने घर में रहते हो सोहनलाल बोला ऐसा ही होता है एक भिखारी का घर .

 

सोहनलाल ने उसको जूती दे दे और लड़की जूती पांव में पहन कर काफी खुश होती है लड़की ने 2000 का नोट सोहनलाल को दिया और बोली बाबा इन पैसों से आप जूते ठीक करने Shop खोल लेना वहां रेलवे स्टेशन पर

           अगर और चाहिए तो बता दो ……………… . ताकि अगर और किसी की जूती टूटे तो वहीं पर ठीक करवा सके ……………… .यह कहते लड़की वहां से चली जाती है ……………… . रेलवे स्टेशन की तरफ और Sohan lal  2000 का नोट देखते हुए पास पड़ी चारपाई बेड बैठ जाता है सोहनलाल खुद से उस लड़की के बारे में बोलता है भगवान तुम्हारा भला करे बेटी.

 


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दूसरा दिन गांव का स्टेशन | Short Motivational Story In Hindi With Moral

 

दूसरे दिन मोहन लाल गांव के रेलवे स्टेशन पर जूते को ठीक करने वाली दूकान लगाकर बैठा है और लोग उससे जूते ठीक करवा रहे है,काम करते — करते शांम { evening } हो जाती है…………और सोहन लाल घर { House } आ जाता है हिसाब करने लगता है जो कमाई हुई वो 550 रूपऐ थी.

सोहन लाल …….. भीख मांगने से यह काम बढियां है………….. कमाई अच्छी होती है.

 

दूसरे दिन मोहनलाल फिर सुबह उठता है और और रेलवे स्टेशन की तरफ निकल जाता है उसने दूफ बत्ती की और अपनी दुकान लगा कर बैठ गया दोपहर का समय हो चुका है अभी तक उसके पास कोई ग्राहक नहीं आया.

              ग्राहक को देखते-देखते शाम हो गई और वह खाली हाथ घर लौट आता है ………… तीसरे दिन सोहनलाल फिर दुकान लगाता है और इस दिन उसने कवेल 50 रू की कमाई की …………….. अगले दिन दुकान लगाता है और जो कमाई होती है वह ₹30 होती है.

तो ऐसे सिलसिला चलता रहता है …………….. कभी दो 2 दिन उसको खाली हाथ ही घर लौटना पड़ता है …………….. कभी उसके पास समान लाने के लिए पैसे नहीं होते.

लेकिन………. धीरे-धीरे लोगों को उसकी दूकान के बारे में पता चलता गयां ……….. धीरे-धीरे आमदनी बढ़ती गई इस तरहां उसका जूतों को ठीक करने का काम चल निकला. 

 

The end 


अंत में

तो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है…….. कि आप कोई भी कार्य कर रहे हो उसको लगन और मेहनत से करें समय जरूर लगता है लेकिन एक दिन आदमी कामयाब हो जाता है ………..अगर दिल और लगन से मेहनत करते हो तो.

 


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