Motivational story in hindi for success | सबसे बडा कर्म

लघु हास्य कथा Motivational story in hindi for success | सबसे बडा कर्म रचना काल्पनिक विचारों पर आधारित है,असल जिन्दंगी में इस रचना के पात्रों का कोई लेना – देना नहीं है.

लघु हास्य कथा एक औरत और उसके लड़के के आसपास घुमती है,जो की एक छोटे से शहर में रहते है और मजदूरी करते है और दुसरी तरफ यह उम्मीद पर कहानी है, जो की आपको एक Massage देती है.

आपको एक प्रेरणा देती है ,कोई भी कार्य को अगर हम मन में ठान ले की यह हमने करना हीं होगा,अगर हम ईरादा पक्का कर ले की हम इस पर जीत पा कर रहेंगे ते उस काम में आपकी विजय होती है.

उसके पिता {father} मजदूर और Mother लोगों के Bartan साफ करनें का काम Work किया करती है,तब कहीं जाकर Evening तक वह दो वक्त की रोटी खाते और अपना पेट भरते है.

वैसे,तो वह अपनी मां mother का  इंतजार  कर रहा था,{फुटपाथ} पर खड़े-खड़े,शहर की चकाचौंध ने उसके कदमों को आगे बढ़ने नहीं दिया,रंग {सांवला} था, पुराने से कपड़े और पांव में चप्पल पहनी हुई थी,जिसको {धागे से धीया}था,फुटपाथ पर बैठ गया और और आते — जाते लोगों को देखता रहा.

 

लोग उसकी तरफ ऐसे देख रहे थे और उनको ऐसा लग रहा था,कि यह बच्चा ना जाने किस वजह से फुटपाथ पर बैठा है,काफी देर तक मां का इंतजार करने के बाद,मां को कहीं नहीं आता देखकर वहां से आगे की तरफ चला गया,जब उसने जाकर देखा तो,उसकी मां काम कर रही थी.


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उसने देखा मकान मालिक  मां को प्लेट टूट जाने पर गाली दे रही थी और उसकी मां मालकिन के आगे हाथ जोड़ी बैठी थी,बिना चप्पल पहने,मां के आंखों में आंसू थे और फटी हुई चुन्नी से वो अपने आंसुओं को पूछ रहीं थी.

 

बच्चे ने धीरे से जाकर मां के आंसू पोछे इतने में मकान मालिक ने गुस्से में बोली निकल यहां से और अपने काले से बच्चे को भी ले जा यहां से मां की इतनी बेजती {insult} बच्चे के दिल में घर कर गई.

 

उसको गुस्सा आया,जो कि उसकी मां को ₹10 की पलेट की बजा से गाली दे रही थी,उसने बूट पॉलिश का काम करना शुरू कर दिया,अक्सर बड़े लोग जूते तो Polish अच्छे से करवा लेते थे

लेकिन {बदकिस्मती} से उसकी जो मेहनत { Payment } बनती थी,वह बच्चे को नहीं देते उसको एहसास हुआ,अकेले Boot polish से कुछ नहीं बनेगा बेटा.

लगभग 3 साल के बाद बच्चे ने बूट पॉलिश का छोड़कर अखबार बेचने का धंधा चालू रखा किंया,उसने एक फैक्ट्री में जाकर ठेकेदार से बात की की वो उसको कपडे सीलाई करके देगा और जैसे की बच्चों की स्कूल वर्दी.

 

उसके बाद ठेकेदार ने फैक्ट्री के मालिक से बातचीत की और लड़के को हां बोल दी,पहले तो ठेकेदार उसके छोटे होने के कारण नहीं मान रहा था,पर बाद में उसने लड़के के हां में हां मिला दी.

 

लड़के ने अपनी मां से अपने आस पड़ोस वाली लड़कियों को महिलाओं को जो बेरोजगार थी,जो Work करने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाया करते थे,उनको काम  देना चालू कर दिया.

 

कुछ समय के बाद,लड़के को अच्छी earning होने लगी,लगी लगभग 22 की उम्र में उसने बहुत से लोगों को रोजगार भी दिया,एक दिन ऐसा आया कि उसने पूरी फैकटरी को ठेडे पर ले लिया.

 

यहां पर एक बात गैर करनी वाली है,की लड़का अनपढ़ था पर उसके अंदर जुनून था,कुछ कर दिखाने का अब उसने अपने घर {House} लिया और एक Car भी खरीद ली,उसने अपने नाम से शहर के बीचो बीच एक होटल भी ले लियां.


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एक दिन जब लड़का और उसकी मां बजार में गाडी के साईड पर लगा रहे थे,तो वहीं मकान मालिकन ने लड़के की मां को पहिचान लिया,वापिस लड़के ने उतर answer दिया.

की यह वहीं औरत है,यांनी की मेरी मां है,जो की आज से ठीक 3 चार साल पहले तुम्हरे यहां पर काम बरतन धोने का काम किया करती थी और मैं वहीं लड़का हूं जिसको आपने काला बोला था.

 

आज वहीं काला लड़का तुम्हरे से आगे निकल गया,कितना आगे की तुम लोग चाह कर भी मेरे से आगे नीं निकल सकती,अगर तुम लोग किसी के आॅसूयों को पोच नीं सकते,तो किसी गरीब का मजाक नहीं उडाना चहिऐ.मकान मालिकन और उसका घरवाला दोनों चुप चाप वहां से आगे की तरफ निकल गए.

 


The End.

अंत में हमें इस छोटी रचना Motivational story in hindi for success | सबसे बडा कर्म से यही शिक्षा मिलती है …………. कि हम कोई भी काम से डरना नहीं चहिऐ चाहे वो कितना भी बडा क्यों ना हो ……अगर मन से डर निकाल देगें तो बडे से बडा काम छोटा और सरल लगने लगता है.


सबसे बडा कर्म लक्ष्य प्राप्ति की कहानी से क्यां सीखते हो ?………….आपको कैसी लगी नीचे कमेंट बॉक्स बना है,अपनी राय देना ना भूलें ………….और हो सके तो अपने दोस्तों के साथ अपने भाई बहनों के साथ छोटी सी रचना को Share जरूर करें.

धन्यवाद

लेखिक :- Sukhwinder Dhimaan  


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